सनातन धर्म में आठ चिरंजीवी (अष्ट चिरंजीवी) माने जाते हैं, जिन्हें वरदान या श्राप के कारण कलयुग के अंत तक जीवित माना जाता है।
ये 8 महान आत्माएं हैं:
अश्वत्थामा,
राजा बलि,
वेदव्यास,
हनुमान,
विभीषण,
कृपाचार्य,
परशुराम और
ऋषि मार्कण्डेय।
इन्हें प्रतिदिन याद करने से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
• अष्ट चिरंजीवी के नाम और कारण:
1 हनुमान: माता सीता से अमरता का वरदान प्राप्त।
2 परशुराम: भगवान विष्णु के छठे अवतार।
3 विभीषण: भगवान राम से वरदान प्राप्त।
4 महर्षि व्यास: वेदों के रचयिता।
5 अश्वत्थामा: भगवान कृष्ण द्वारा युगों तक भटकने का श्राप (महाभारत)।
6 राजा बलि: भगवान विष्णु ने पाताल लोक का राजा बनाया।
7 कृपाचार्य: कौरव-पांडवों के गुरु।
8 ऋषि मार्कण्डेय: शिवजी के आशीर्वाद से 16 वर्ष की आयु में अमरता प्राप्त।
इन चिरंजीवियों के अस्तित्व को भारतीय पौराणिक मान्यताओं में विश्वास के साथ जीवित माना जाता है, जो कलियुग में भी धर्म के रक्षक हैं।